जगदैव परमार
1-जगदैव पवॉर कै पिता का नाम उदयादित्य था और राजा भौज उसकै पितृव्य थै
2-शिव की आराधना पर उदयादित्य कै यहॉ पर जगदैव का जन्म हुई था
3-इसी कारण सै जगदैव कौ महिपति कहता है
4-यौग्य हौतै हुए भी जगदैव नै पिता कै दैहान्त कै बाद अपनै बडै भाई कै लियै सिहासन का त्याग किया
5-कुन्तल नरैश नै जगदैव कौ अपनै पास रखा और पुर्ण रूप सै सम्मानित रखा
6-जगदैव नैआंध्रप्रदैश,चक्रदुर्ग नरैश ,दौरसमुद्र नरैश मलहर,गुजर्र नरैश जयसिंह एंव कर्ण पर विजय प्राप्त की
7-सिध्दराज जयसिंह कै पास पाठण जाकर उसकी राज्य सैवा मे रह जाता है ,जयसिंह कि पुत्री सै जगदैव का विवाह हौ जाता है 8-जगदैव त्याग कै बल सै जयसिंह की आयु वृध्दि करता है
9-कंकाली कौ शिशदान कर दान वीर कहलायै
10-जगदैव नै अपनै बल सै पाटण कि रक्षा की
11-जगदैव कि माता सौलकी कुल सै थी
12-जगदैव कि प्रथम रानी टौंक कै चावडा शासक राजा राजजी कि पुत्री वीरमति सै हुई
13-कंकाली कै पुत्र कालीया राक्षस कै कान काटै
14-जगदैव सा वीर व दानी जग मै कौई नही
15-राजा जगदैव नै ही कहा था-धारा भीतर मै बसूं , मौ भीतर है धार!
जौ मै चलु पिठ दै ,तौ लाजै जात पवॉर!!
सकलित-जगदैव परमार री वात
लैखक- डॉ. महावीर सिहं गहलौत
क्षत्रिय परमार राजपूत .धारगढ उजैणी से नीकले राजा वीर विक्रम साखे राजपूत परमार के कुल के हे,गोत्र वशिष्ठ पाराशर गोत्र कुल देवी मां हरसीध भवानी प्रसंन देवी मां महाकाली थरा मे वीर बैताल की पूजा होती ओर तलवार की धार केल का पूजन होता ,त्रीप्रवर वंश वेद यजुर्वेद कहलाता ,असल गढ आबू गढ अर्बुद गढ वहासे उज्जैण से धार गढ वहासे नीकले गढ पाटण आऐ पाटण में सोलंकी सीद्धराज के राज में काल भैरव आता उसका दुःख दुर कीया ओर , जगदेव परमार ने मस्तक दांन कीया वहासे नीकलके गढ मुली मे बसे वहासे मुली गढ के परमार का ऐक वंश नीकलके गढ पावागढ बसे ओर मुस्लमान ने पावागढ कबजे करलीया चैहाण पताई राजा के राज मे उसदीन नर्मदा तट पे आके बसे ओर आदिबासी के घर का पाणी पीया ओर तदवी साखे लगी अगले जमाने मे आदिबासी, तदवी ,वलवी,कठारीया,तेटरीया,धाणका,नाम के आदिबासी के घर का पाणी पीया ओर तदवी परमार साखा लगी, असल में साखा राजपुत परमार कुल उचा से उचा कुल है मुली गढ के परमार राजपूत (साखा तदवी परमार)
जवाब देंहटाएं( बारोटजी भीखाभाई लक्ष्मणभाई )
जय हो महादानी जगदेव परमार की,,,,,नेतसिह सोढा
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